हेलो दोस्तों, मेरा नाम राज है। मैं 22 साल का हूँ, कॉलेज में पढ़ता हूँ, और घर में मेरी 19 साल की छोटी बहन प्रिया रहती है। हम दोनों के मम्मी-पापा एक बिज़नेस ट्रिप पर चले गए थे, तीन दिन के लिए। घर में सिर्फ हम दोनों थे, और वो रात से ही मेरा दिमाग कुछ अलग ही सोचने लगा। प्रिया हमेशा से मेरी फेवरेट थी—उसकी स्लिम फिगर, गोल-गोल बूब्स, टाइट गांड और वो मासूम सी स्माइल। मैं उसके बारे में सोच-सोच कर अपना लंड खड़ा कर लेता था, लेकिन कभी हिम्मत न हुई थी कुछ करने की। लेकिन इस बार, मौका मिल गया।
सुबह ही मम्मी-पापा चले गए। प्रिया किचन में नाश्ता बना रही थी, उसने एक टाइट टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने थे, जिससे उसकी गांड की शेप साफ दिख रही थी। मैं पीछे से गया और उसके कमर पे हाथ रख दिया। वो चौंक गई, ‘भैया, क्या कर रहे हो?’ मैंने हंसा, ‘बस, गले लग रहा हूं, इतने दिन अकेले रहेंगे तो क्या?’ प्रिया शर्मा गई लेकिन दूर न हुई। दोपहर में हम मूवी देख रहे थे, और मैं जान-बूझकर एक हॉट सीन पे रुक गया जहां भाई-बहन टाइप का रोमांस था। प्रिया की सांसें तेज हो गई। मैंने कहा, ‘प्रिया, तू इतनी हॉट लगती है, कभी सोचा है हम ऐसा कुछ करें?’ वो लाल हो गई, लेकिन आँखों में क्यूरियोसिटी थी।
शाम को, मैंने उसको रूम में बुलाया। ‘प्रिया, एक बात बता, तू वर्जिन है ना?’ वो शर्मीले हुए हाँ में सिर हिला दिया। मैं उसके पास बैठ गया, उसके हाथ पकड़े और किस कर दिया। पहले वो रेसिस्ट की, लेकिन फिर उसने भी रिस्पॉन्ड किया। मेरी जीभ उसके मुँह में डाल दी, और हाथ से उसकी टी-शर्ट ऊपर किया। उसकी ब्रा के अंदर गोल बूब्स दबाने लगा। प्रिया सिसकियाँ लेने लगी, ‘भैया… यह गलत है… आह…’ मैंने कहा, ‘शश्श, यह हमारा सीक्रेट है, एन्जॉय करो।’
मैंने उसकी टी-शर्ट और ब्रा उतार दी। उसके गुलाबी निपल्स को मुँह में ले लिया और छूने लगा। प्रिया की चूत गीली हो गई थी, मैंने शॉर्ट्स उतारे और पैंटी में हाथ डाल दिया। एक उंगली उसकी टाइट चूत में घुसा दी, वो चीख उठी, ‘आह भैया, दर्द हो रहा है!’ मैं धीरे-धीरे उंगली अंदर-बाहर करने लगा, और दूसरे हाथ से उसके क्लिटोरिस को रगड़ने लगा। प्रिया अब गरम हो चुकी थी, उसने मेरी पैंट उतारी और मेरा लंड हाथ में ले लिया। ‘भैया, यह इतना बड़ा है!’ वो डर रही थी लेकिन एक्साइटेड भी।
मैंने उसको बेड पे लिटाया, टांगें फैला दी और मुँह से उसकी चूत चाटने लगा। मेरी जीभ उसकी चूत के फोल्ड्स पे घूम रही थी, क्लिट पे चूस रहा था। प्रिया तड़प रही थी, ‘उह… भैया… मत रुकना… आह!’ उसने मेरा सिर पकड़ लिया। 10 मिनट बाद वो झड़ गई, उसकी चूत से पानी निकल आया। अब मेरी बारी। प्रिया ने मेरा लंड मुँह में लिया और चुनने लगी—पहले अजीब, फिर एक्सपर्ट बन गई। मैं उसके बाल पकड़ के मुँह में ढकेल रहा था, ‘हाँ प्रिया, ऐसे ही चूस, मेरा लंड तेरी गीली ज़ुबान पे।’ वो गप कर रही थी लेकिन रुक न हुई।
फिर मैंने उसको मिशनरी पोजीशन में लिटा दिया। मेरा लंड उसकी चूत पे रगड़ा, और धीरे से अंदर घुसा दिया। प्रिया चीखी, ‘दर्द! भैया रुक जाओ!’ लेकिन मैं रुक ना, पूरा लंड अंदर डाल दिया। खून निकल आया, वो वर्जिन थी। धीरे-धीरे जोर लगाने लगा, उसकी चूत टाइट थी, मेरा लंड उसमें फंस जा रहा था। प्रिया की चीखें सिसकियों में बदल गई, ‘फास्टर भैया… छोड़ो मुझे!’ मैं तेज़ी से पेलने लगा, उसके बूब्स हिल रहे थे। 20 मिनट बाद मैं झड़ गया, उसकी चूत में ही वीर्य छोड़ दिया। हम दोनों थक कर सो गए, नंगे ही एक दूसरे से लिपट कर।
सुबह उठी तो प्रिया पहले से ही किचन में थी, सिर्फ एप्रन पहने। मैं पीछे से गया, लंड उसकी गांड पे रगड़ा। ‘प्रिया, कल रात याद है?’ वो मुस्कुराई, ‘हां भैया, अब और करेंगे।’ नाश्ता करते हुए मैंने उसके मुँह में उंगली डाल दी, और बोला, ‘आज तेरा मुँह मेरा लंड चाहेगा।’
दोपहर में हम बेडरूम में थे. प्रिया ने मेरा लंड हाथ में लिया और चुनने लगी। मैं उसके सर पे हाथ रखा, डीपथ्रोट करवा रहा था। ‘हां, पूरा अंदर ले, मेरी रंडी बहन।’ वो चूस रही थी, लार से मेरा लंड चमक रहा था। फिर मैंने उसको घुटनो पे बैठाया और 69 पोजीशन में आया। मेरी जीभ उसकी चूत में, और उसका मुँह मेरे लंड पे। हम दोनों एक दूसरे को खा रहे थे—मैं उसकी गांड भी चाट रहा था, उंगली डाल रहा था।
प्रिया बोली, ‘भैया, एक मजाक करूं?’ वो किचन गई, डेयरी मिल्क चॉकलेट लाई और मेरे लंड पे लगा दी। फिर उसको लॉलीपॉप की तरह चाटने लगी- चॉकलेट के साथ मेरा लंड चूस रही थी। मेरा लंड इतना हार्ड हो गया कि दर्द होने लगा। 15 मिनट तक वो चूस रही थी, मैं तड़प रहा था। फिर मैंने उसको बिस्तर पर झुका दिया और पीछे से चूत में लंड डाल दिया। डॉगी स्टाइल में तेजी से चोद रहा था, उसकी गांड पर थप्पड़ मार रहा था। ‘ले साली, मेरा लंड तेरी चूत में!’ प्रिया चिल्लाई, ‘हां भैया, चोद दो, झड़ रही हूं!’ हम दोनो साथ झड़े, उसकी चूत से बाहर टपक रहा था।
शाम को हम शॉवर ले रहे थे. मैं उसके स्तन पर साबुन लगाया, और वहां से चूत तक हाथ चला गया। प्रिया ने मेरा लंड हाथ में पकड़ा और हिलाने लगी। शॉवर के नीचे ही मैंने उसको दीवार पर टिकाया और योनि सेक्स किया—पानी गिर रहा था, हमारी सिसकियाँ गूंज रही थीं। रात को हम नंगे सोये, एक दूसरे को छेड़ते रहे।
आखिरी दिन, टेंशन थी क्योंकि माता-पिता वापस आने वाले थे। लेकिन प्रिया अब पूरी तरह मेरी हो चुकी थी। सुबह वो उठी और मेरा लंड मुँह में ले लिया, जाग जाओ। ‘भैया, आज कुछ नया ट्राई करें?’ मैं बोला, ‘हां, तेरी गांड मारूंगा।’ वो डर गई, ‘पर दर्द होगा ना?’ मैं बोला, ‘धीरे से करूंगा, लुब्रिकेंट लगाएंगे।’
मैंने उसको पेट के बल लिटाया, गांड पे तेल लगाया। एक उंगली पहले डाली, वो सिसकियां ले रही थी, ‘आह भैया, धीरे…’ फिर दो उंगली, स्ट्रेच कर रहा था। प्रिया की गांड टाइट थी, लेकिन वो रिलैक्स कर रही थी। अब मेरा लंड गांड पे रखा, टिप अंदर ढकेल दी। प्रिया चिल्ला उठी, ‘दर्द! रुको!’ मैं रुक गया, किस किया उसको, और फिर धीरे से पूरा अंदर डाल दिया। गुदा मैथुन शुरू- धीरे-धीरे जोर लगाओ, उसकी गांड मेरा लंड खींच रही थी। प्रिया अब मजे ले रही थी, ‘तेज़ भैया, गांड चोद दो!’ मैं तेजी से पेलने लगा, हाथ से उसकी चूत में उंगली डाल रहा था।
15 मिनट बाद मैं झड़ गया, उसकी गांड में भर दिया। प्रिया भी क्लिट रगड़ने से झड़ गई। फिर हमने शावर लिया, और आखिरी योनि चुदाई की—उसने मुझपे चढ़कर सवारी की, स्तन हिलाते हुए। ‘भैया, ये तीन दिन भूलूंगा नहीं!’ माता-पिता आएं, हम सामान्य हो गए, लेकिन रातों में चुपके से छूते रहे।